IPL 2022: राशिद खान जहां साबित हुए 'इक्का', वहां क्यों फेल हो गए अश्विन-चहल? समझिए पूरा मामला

गुजरात टाइटंस के लिए आईपीएल-2022 के पहले क्वॉलिफायर में सबसे बड़ा खतरा युवजेंद्र चहल और रविचंद्रन अश्विन को माना जा रहा था। इन दोनों ने इस मैच से पहले 37 विकेट झटके थे, जिसमें चहल के 26 और अश्विन के 11 विकेट शामिल थे। हर कोई उनकी बात कर रहा था। कोलकाता में ओवरकास्ट कंडीशन में इन्हें संजू सैमसन का ब्रह्मास्त्र माना जा रहा था, लेकिन गुजरात की दमदार रणनीति के आगे इस जोड़ी के सारे पैंतरे फेल हो गए।

चहल और अश्विन ने न केवल 8 ओवरों में 72 रन खर्च किए, बल्कि एक भी विकेट नहीं चटका सके। राजस्थान के लिए यही आत्मघाती साबित हुआ। उसे उम्मीद थी कि जिस तरह से लीग मैचों में चहल की तूती बोली थी उसी तरह वह यहां भी करिश्मा करने में सफल रहेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दूसरी ओर, गुजरात टाइटंस के राशिद खान ने विकेट तो नहीं चटकाया, लेकिन सिर्फ 15 रन देकर राजस्थान को 200 का आंकड़ा पार करने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।

क्यों खाली रही चहल और अश्विन की झोली?

दुनिया का हर क्रिकेटर इस बात से सहमत होगा कि युजवेंद्र चहल और आर. अश्विन किसी भी कंडीशन और मैदान पर विकेट झटकने में सक्षम हैं। उनके पास विविधता की भी कमी नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि ये फेल क्यों हुए? दरअसल, इसके लिए गुजरात की रणनीति को भी बड़ा श्रेय जाना चाहिए। हार्दिक पंड्या हों या डेविड मिलर उसके हर बल्लेबाज ने इन्हें संभलकर खेला। उनकी कोशिश थी कि लगभग हर गेंद पर कम से कम सिंगल ले, जिससे कि अतिरिक्त दबाव नहीं बने।

एक बाउंड्री वाली रणनीति पड़ी चहल-अश्विन पर भारी

आखिरी 5 ओवरों में गुजरात को जीत के लिए 50 रनों की जरूरत थी। इसके बाद आर. अश्विन और युजवेंद्र चहल दोनों ही बॉलिंग के लिए आने वाले थे। कॉमेंटेटर्स भी इस बारे में बात कर रहे थे कि गुजरात के लिए इतने रन बनाने आसान नहीं होंगे। उन्हें क्या पता था कि गुजरात के पास इन दोनों का ही तोड़ है। डेविड मिलर और हार्दिक पंड्या ने लगभग हर गेंद पर सिंगल लिए और एक बाउंड्री टारगेट की। ऐसे में आसानी से 10-12 रन जुटा ले गए और टीम का काम बन गया।

स्पिनर से कहीं अधिक तेज गेंदबाज दिखे अश्विन

अश्विन वैसे तो ऑफ स्पिनर हैं, लेकिन गुजरात के खिलाफ जब उनके पहले ही ओवर शुभमन गिल ने एक छक्का और दो चौके उड़ा दिए तो उन्होंने अपनी बॉलिंग में बदलाव किया। स्पिन नहीं मिल रही थी तो उन्होंने बॉल को तेज फेंकना शुरू कर दिया। एक गेंद तो उनकी 131 kph की रही, जो अमूमन फास्ट बॉलर करते दिखाई देते हैं। अगर स्पिनर फास्ट बॉलिंग करने लगे तो डेविड मिलर जैसे साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज को कहां दिक्कत होने वाली थी।

राशिद खान इतने प्रभावी क्यों?

अफगानिस्तान का यह करिश्माई खान अपनी बॉलिंग में विविधता की वजह से जाना जाता है। वह एक ओवर की 6 गेंद अलग-अलग तरीके से तो सिर्फ गुगली ही कर सकते हैं। जिस बॉलर के पास सिर्फ गुगली में इतने विकल्प हों तो सोचिए कि यह लेग स्पिनर कितना खतरनाक है। वह कई बार कलाई तो कई बार फिंगर का इस्तेमाल करते हैं। यही नहीं, वह हमेशा अपने बदलाव से बल्लेबाज को हैरान करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि विपक्षी टीम का बल्लेबाज उनके खिलाफ हवाई शॉट खेलने से बचता है।
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