इन 4 खिलाड़ियों ने खेली क्रिकेट इतिहास की सबसे निस्वार्थ पारियां! आज भी क्रिकेट फैंस करते हैं सलाम


क्रिकेट ना कि स्वयं बल्कि एक टीम का खेल होता है, जिसमें खिलाड़ी अपने बारे में नहीं बल्कि अपनी टीम के खिलाड़ियों के बारे में सोचता है। क्रिकेट इतिहास में बहुत ही ऐसी पारियों को याद किया जाता है। ऐसे बहुत से मौके सामने आए जब खिलाड़ियों ने अपनी टीम को अपने आप से आगे रखा। आज ऐसी ही पारियों के बारे में बात करेंगे जो बिना किसी स्वार्थ के खेली गई। इसमें कारनामा भारतीय खिलाड़ियों द्वारा किया गया। मात्र एक विदेशी खिलाड़ियों लिस्ट में शामिल है।

रोबिन उथप्पा

उस समय बड़े शॉट खेलने की क्षमता रखने वाले रोबिन उथप्पा मौके मिलने पर भी स्ट्राइक रोहित शर्मा को दे देते थे। जिसके कारण ही वह 264 रनों की पारी खेलने में कामयाब रहे, जो एकदिवसीय क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ पारी थी। 16 गेंदों में मात्र 16 रनों की पारी खेल सके उथप्पा ने 11 ओवरों तक बल्लेबाजी की। इतनी लंबी बल्लेबाजी के दौरान मात्र 16 गेंद ही खेलते दिखने से यह पता चलता है। कि रोबिन उथप्पा ने उस समय अपने बजाएं रोहित शर्मा के लिए अधिक सोचा।

वीरेंद्र सहवाग

भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी इस लिस्ट में शामिल है। चेन्नई टेस्ट के दौरान चौथी पारी में भारतीय टीम को जीत के लिए 387 रनों की जरूरत थी, लेकिन भारतीय टीम के लिए जीत पाना बेहद ही मुश्किल नजर आ रहा था। वीरेंद्र सहवाग ने अपनी बल्लेबाजी के दौरान मात्र 68 गेंदों में शानदार 83 रनों की पारी खेली। मैच के आखिरी दिन युवराज सिंह द्वारा अच्छी पारी खेलकर टीम को महत्वपूर्ण जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई गई। युवराज सिंह इस मैच के हीरो कहे जाते हैं। पर वीरेंद्र सहवाग ही वे खिलाड़ी थे जिनकी आक्रमक पारियों के कारण बल्लेबाजों को खेलने का मौका मिला, जिससे यह पारियां निस्वार्थ भाव से खेली गई। और इनका नाम निस्वार्थ पारियों की लिस्ट में शामिल हुआ।

सौरव गांगुली

सौरव गांगुली को नेटवेस्ट ट्रॉफी के दौरान फाइनल में अपनी टीशर्ट हवा में लहराने के लिए याद किया जाता है। जब सौरव गांगुली ने बहुत ही निस्वार्थ भाव से एक शानदार पारी खेली थी। सलामी बल्लेबाजी करने वाले सौरव गांगुली उस समय 326 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहे थे। सहवाग के साथ मिलकर गांगुली द्वारा आक्रामक बल्लेबाजी के दौरान 43 गेंदों पर 60 रनों की आक्रामक पारी खेली गई। टीम को जीत दिलाने का श्रेय युवा मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह को जाता है।

माइकल क्लार्क

आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज माइकल क्लार्क ने भी भी इस मैच के दौरान बहुत ही शानदार पारियां खेली,और 329 रन बनाए। उस समय माइकल क्लार्क मैथ्यू हेडन का रिकॉर्ड और साथ ही ब्रायन लारा का रिकॉर्ड भी तोड़ आस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ी टेस्ट पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपनी टीम के लिए सोचा और पारी घोषित कर गेंदबाजी की। माइकल क्लार्क द्वारा इस पारी को निस्वार्थ भाव से खेला गया। जिसके चलते भारतीय टीम इस मैच में बुरी तरह से हार गई।


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